Saturday , 8 August 2020
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भारत को आँखे दिखाने वाला चीन था हिन्दूराष्ट्र ये रहे प्रमाण

vedic culture in china : आज चीन हमें आँखे दिखा रहा है और भारत भूमि पर

अपना अधिकार करने के  स्वप्न भी देख रहा है | इसके प्रमाण मिलें है और  ये जानकर

गर्व का अनुभव होगा कि चीन भी कभी हिन्दू राष्ट्र हुआ करता था |

चीन की लंका vedic culture in china

  • Journal Of Royal Asiatic Society में प्रोफेसर G.Phillips का एक लेख है
  • जिसमें वे कहतें है की भारत के लोग चीन में नोकाओं के द्वारा पहुंचे थे
  • और भारतीयों ने चीन में लंका नाम की बस्ती Kias-Tehoa सागर तट पर स्थापित की थी |

चीनी कला पर भारत का प्रभाव

  • अंग्रेजो के शासन में मुंबई और कलकत्ता के सरकारी कला विद्यालयों के प्राचार्य E.B Havell नाम के एक अंग्रेज व्यक्ति थे | vedic culture in china
  • उन्होंने लिखा था कि ईस्वी सन के आरम्भ में चीन कि कला का आधार भारत ही था |
  • चीन तथा कोरिया द्वारा भारतीय चित्रकला ने जापान में भी प्रभाव डाला था |
  • आर्यन्तरंगिनी ग्रन्थ में प्रकाशित एक टिप्पणी के अनुसार रामायण में चीन को कोषकार यानि रेशम का कोष निर्माण करने वाले कीड़ों का प्रदेश कहा जाता था | vedic culture in china
  • Dr. Li Chi नाम के एक चीनी इतिहासज्ञ ने अपने शोध से यह निष्कर्ष निकाला है कि
  • भारत के मोहनजोदडो में पाए गये मिटटी के बर्तन और मेसोपोटामिया में पाए गये बर्तन चीन में मिले उस समय के बर्तनों जैसे ही ही | vedic culture in china
  • इसका अर्थ है की इन सभी स्थानों में एक ही सभ्यता थी |

बुद्ध से पहले था चीन में योग 

  • चीन में योग बहुत समय पहले से ही था |
  •  क्न्फुशिय्स नाम का एक चीनी नीतिज्ञ योग मुद्रा में ध्यानमग्न रहता था |
  • चीनी समाज का मार्गदर्शन करने के लिए उसने योगध्यान का त्याग किया |
  • उस समय चीनी लोग बोद्ध पन्थ के अनुयायी नहीं थे |

मार्कोपोलो द्वारा मन्दिरों का उल्लेख 

  • मार्कोपोलो ने सैंकड़ो वर्ष पूर्व चीन तक का प्रवास किया था और वह वेनिस नगर का रहने वाला था |
  • मार्कोपोलो ने चीन के प्रवास कि लिखा था जो इस प्रकार है :
  • चीन में कटन नगर में एक चीनी देवालय था जिसमें 500 देव मूर्तियाँ थी |
  • उसी ग्रन्थ में यह भी लिखा है की चीनी लोग अपने पूर्वजों का श्राद्ध भी करते थे |
  • शिष्य गुरुजनों कि पदपूजा भी करते थे | vedic culture in china

जिस जुजु नगर में लगभग 2000 लोग रहते थे और उस नगर में अनेकों प्रकार के मन्दिर थे | इस नगर में अनेको तरह एक देवताओं कि भी पूजा की जाती थी | मार्कोपोलो ने यह भी लिखा है की चीनी लोग मृत व्यक्ति को भूमि में गाड़ते नहीं थे बल्कि उसका दाह संस्कार करते थे | लोग सादे कपड़े पहनते हुए शोक मनाते थे और भजन करते हुए शव यात्रायें निकाली जाती थी |

ब्रह्मा का मंदिर 

मार्कोपोलो ने अपने ग्रन्थ के खण्ड २ में Hang Chau का नक्शा दिखाया है | शहर की सीमा के अंदर ब्रह्मा का मन्दिर नक़्शे में बताया गया है |

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