Saturday , 8 August 2020
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Sukhdev Thapar in Hindi – हुतात्मा सुखदेव थापर

Sukhdev : स्वत्रंता  सेनानी सुखदेव थापर जी का नाम हमेशा वीर जवानों की श्रेणी में लिया जाता है |  इस क्रांतिकारी के बारे में जब भी बात होती हैं आंखों में गर्व के आंसू छलक जाते हैं। धन्य है ये भारत भूमि जिसने इस महान सपूत को जन्म दिया। सुखदेव थापर का जन्म पंजाब के शहर लुधिअना में श्रीयुत् रामलाल थापर और श्रीमती रल्ली देवी के घर पर 15 मई 1907 को हुआ था। जन्म से तीन माह बाद ही इनके पिता का स्वर्गवास हो जाने के कारण इना पालन-पोषण इनके ताऊ अचिन्तराम ने किया था

 भगत सिंह के साथ घेहरी मित्रता

सुखदेव और भगत सिंह दोनों ‘लाहौर नेशनल कॉलेज‘ के छात्र थे। दोनो पंडित चंदर शेखर आजाद के विचारो से बहुत प्रभावित थे , उनके साथ कम करने के लिए बहुत इछुक रहते थे | एक दिन सुखदेव जी को पता चला पंडित जी से संपर्क हो सकता है | उन्होंने संपर्क सूत्र से मिल कर लाला लाजपत राइ से मिलकर चंदर शेखर आजाद जी कि पार्टी ज्वाइन कर ली | भगत सिंह को पार्टी भी इन्होने ही समिलित करवाई थी | 

लाला जी का बदला 

 जब साइमन कमीशन भारत आया तो हर तरफ शहीद सुखदेव ने उनका तीव्र विरोध किया। वहीं जब पंजाब में लाला लाजपत राय का लाठीचार्ज के दौरान देहांत हो गया तो सुखदेव ने भगत सिंह के साथ मिलकर ही बदला लेने की ठानी थी। वो कुशल रणनीतिकार भी थे।

इस सारी योजना के सूत्रधार सुखदेव ही थे। कहा जाता है कि सेंट्रल आसेंबली के सभागार में बम, पर्चें फेंकने की नींव और रीढ़ शहीद सुखदेव ही थे। उनका मानना था कि चाहे जो भी काम करो उसका उद्देश्य सभी के सामने स्पष्ट रूप में होना चाहिए।

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आजाद जी से मिलकर भगत सिंह और और सुखदेव जी ने सान्द्रस को गोली मार कर हत्या आर दी थी | इनके पीछे एक भारतीय सिपाही दौड़ पड़ा था आखिर उसको २ बार रोकने के बाद आजाद जी ने गोली मार कर हमेशा के लिए सुला दिया था | 

कोलकत्ता जा आर बम बनाना सीखना 

सान्द्रस से बदला लेकर सभी क्रन्तिकारी पंजाब से निकाल कर कोलकाता चल गये थे | शहीद सुखदेव ने अपने जीवन में नाई की मंडी में बम बनाना भी सीखा। ये बात बेहद ही कम लोग जानते हैं। कलकत्ता ( Kolkata ) में भगत सिंह की मुलाकात यतीन्द्र नाथ से हुई। नाथ बम बनाने की कला जानते थे। वहां भगत सिंह ( Bhagat Singh ) ने गनकाटन बनाना सीखा।

साथ ही अपने अन्य साथियों को ये कला सिखाने के लिए आगरा में दल को दो टीमों में बांटा गया। जहां उन्हें बम बनाना सिखाया गया। नाई की मंडी में बम बनाने की कला सिखने के लिए शहीद सुखदेव को बुलाया गया। सुखदेव यहां आए और बम बनाना सीखा। बाद में उन्होंने इन्हीं बमों का इस्तेमाल असेंबली बम धमाकों के लिए किया था। Sukhdev

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असेंबली में बम धमाके

इस  क्रन्तिकारी समुदाय ने एसी योजना बनाई भारतीय लोगो में आक्रोश और उम्मीद जाग गई | इन्होने एक असेंबली में बम धमाका करने कि योजना बनाई जिस से किसी को हानि नहीं पहुंचेगी पर धमाके कि आवाज़ इंग्लैंड तक जाती | इहोने एक असेंबली में धमाका किया और सभी क्रन्तिकारी गिरफ्तार हो गयी | इन नौजवानों कि घटना से देश उठ खड़ा हुआ | देश के सभी वर्ग इनके साथ समर्थन में खड़े हो गये | Sukhdev

इनका मानना था कि चाहे जो भी काम करो उसका उद्देश्य सभी के सामने स्पष्ट रूप में होना चाहिए। आज भले ही वो हम सबके बीच नहीं हैं, लेकिन वो लोगों के दिलों में अब भी जिंदा हैं।

Source : Mere Bhai Shahid Sukhdev | Publisher: Praveen Parkashan (1992) |Language: Hindi | ASIN: B07CVGPBWR

 

 

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