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बड़ा खुलासा: रूस में थे नेता जी सुभाष चन्द्र बोस, विमान दुर्घटना थी झूठी

Subhash Chander bose was in Russia: भारत में अनेकों ऐसे तथ्य आज भी भारत सरकार की

फाइलों में दफन हुए पड़े है | इनमें से ही एक रहस्य है नेता जी सुभाष चन्द्र बोस का |

कुछ का कहना है कि नेता जी विमान दुर्घटना में पंच तत्वों में विलीन हो गये |

तो कुछ का कहना है कि विमान दुर्घटना हुई ही नहीं थी | नेता जी की मृत्यु के रहस्य पर कुछ कमेटियां बनाई गई थी |

इन्ही के आधार पर एह पता चलता है कि नेता जी विमान दुर्घटना के बहाने रूस में चले गये थे | नेता जी

नेता जी के रूस में होने के तथ्य Subhash Chander bose was in Russia

  • शहनाज़ कमेटी को दिए गये अपने बयान में आनद मोहन राय ने बताया था कि 1944 के अंत में

जब वह जापानी विदेश मंत्री शिगेमित्सु उनके  विभाग के मुखिया , से मिले तो उन्हें बताया गया

कि टोक्यो में हुए उनके पिछले और आखिरी  दौरे में नेता जी ने रुसी राजनयिक से मिलने की इच्छा

जताई थी लेकिन उन्हें जापानी सहयोग नहीं मिला | बाद में नेता जी ने खुद सहाय को बताया कि

उन्होंने जापानी सैन्य मुखियाओं से कहा था कि वे मंचूरिया के रस्ते उनके रूस जाने का इन्तेजाम करवाएं |

  • 36जापानी अफसर मोरियो ताकाकुरा ने कहा था कि जून 1945 में नेताजी , तेराउची और इसोदा के बिच

बैंकाक में नेता जी की ओर से जापान सरकार के रूस के साथ सम्पर्क साधने पर चर्चा हुई थी |

इसके बाद 16 अगस्त 1945 को उन्होंने बोस के साथ बैठकर मंचूरिया यात्रा की योजना बनाई थी

और उनकी रूस यात्रा को अति गोपनीय रखा गया था | Subhash Chander bose was in Russia

  • 16 अगस्त की बैठक के बारे में हबीब उर रहमान और उनके सचिव मेजर भास्करन मेनन ही जानते थे |

भास्करन ने खोसला आयोग को यह बताया कि नेता जी ने सोवियत रूस को एक गोपनीय संदेश भी भेजा था |

मेनन के आगे कहा कि वह रूस जाने वाली पूरी रात को जागते रहे और और उन्होंने एक निर्देश दिया कि

मैं विमान यात्रा की पूर्व संध्या पर आपको संदेश लिख रहा हूँ कौन जाने मेरे साथ कोई दुर्घटना न हो जाये |

अन्य तथ्य 
  • कर्नल प्रीतम सिंह 17 अगस्त तक नेता जी के साथ रहे थे और उनके साथ सोवियत रूस भी जाने वाले थे |

उन्होंने मुखर्जी आयोग को बताया कि जापानी विदेश मंत्री के साथ उनकी बात सफल रही थी और रुसी

लोग उनकी धरती पर स्वागत के लिए तत्पर थे | इसके बाद उन्होंने कहा कि हालातों के कारण हमें

अगले 10 वर्षों तक भारत से बाहर रहना पड़ सकता है | Subhash Chander bose was in Russia

Also Read : 2006 में सोनिया गाँधी को दान में मिले थे 10 लाख रूपये 

  • अरधेंदु सरकार हैवी इंजीनिरींग कारपोरेशन के चीफ इंजीनियर थे | उन्होंने मुखर्जी आयोग को ब्यान दिया

कि वे 1960 के दशक में रूस में नियुक्त थे | वहाँ उनके एक वरिष्ठ सहकर्मी जेरोविन ने बताया था कि वह

बर्लिन में नेता जी से मिल चुके थे | वे एक बार और 1948 में यूराल पहाड़ों के पास

बनी रेलवे लाइन के अंत में जो गुलाग था वहाँ पर मिले थे |

उन्होंने बताया कि नेता जी को अच्छी तरह से रखा जा रहा था और उनके पास एक गाड़ी भी थी

और दो अंगरक्षक भी थे |

  • विदेश मंत्रालय के पूर्व अधिकारी राय सिंह यादव को एक रुसी राजनयिक ने बताया था कि हम लोग

यूरोप से रिश्ते नहीं बिगड़ना चाहते थे | भारत सरकार जानती थी कि नेता जी साइबेरिया की

ठण्ड और तन्हाई में पड़े थे| Subhash Chander bose was in Russia

  • 1996 में विदश मंत्रालय के पूर्वी यूरोप विभाग के प्रभारी संयुक्त सचिव आर एल नारायण ने माना

कि समय समय पर रूस में प्रकाशित लेखों से यह साफ़ झलकता था कि 1945 के बाद नेता जी सोवियत संघ में रहे थे |

Source : नेता जी रहस्य गाथा , लेखक: अनुज धुर 

 

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