story-of-gora-and-badal
story-of-gora-and-badal

वो हिन्दू योद्धा सिर कटने के बाद भी खिलजी की सेना से लड़ता रहा

Story Of Gora and Badal : भारत में अनेकों ऐसे योद्धा पैदा हुए है जिन्होंने आक्रान्ताओं को मुहँ तौड़ जवाब दिया | राजपूत योद्धाओं का जीवन और उनके वीर कारनामे तो पुरे भारत में प्रसिद्ध हैं | गौरा और बदल ऐसे ही योद्धा हुए है जिन्होंने खिलजी को लोहे के चने चबवा दिए थे | बादल गौरा का भतीजा था और वे दोनों ही चौहान वंश के थे और मेवाड़ के राजा रत्न सिंह के प्रमुख सैनिक थे |

राजा रत्न सिंह को खिलजी की कैद से छुड़ाना :  Story Of Gora and Badal

1298 में खिलजी ने चितौड़ को घेर लिया था और राजा रत्न सिंह युद्ध की तैयारी में थे | राजा रत्न सिंह की रानी माता पद्मनी की सुन्दरता की ख्याति बहुत दूर दूर तक थी और खिलजी ने युद्ध विराम की एक शर्त रखी कि  वह रानी पद्मनी को देखना चाहता है | सभी राजपूत योद्धा इसके पक्ष में नहीं थे क्योंकि रानी पद्मनी उनका मान था और वे उनको अपनी माता समान मानते थे |

दर्पण में देखते ही हो गया था पागल

आइना जिसमें खिलजी ने रानी पद्मनी को देखा था 

लेकिन रानी को भय था कि अगर उसकी यह इच्छा न पूरी की गई तो मेवाड़ राज्य को अपने वीर सैनिक खोने पड़ेगे | इस तरह खिलजी को महल में बुलवाकर आइने से रानी पद्मनी का चेहरा दिखाया गया | इस अपमान के विरोध में गौरा और बादल महल छोड़कर चले गये | उसी दौरान खिलजी ने राजा रत्न सिंह को कैद कर लिया और उसको अपने साथ ले गया |

Read This : इस 14 कारणों से हो रहा है पाताल लोक वेब सीरिस का विरोध 

रानी पद्मनी के आग्रह पर गौरा और बादल राजा रत्न सिंह को छुडवाने के लिए मान गये | रणनीति के तहत गौरा को दूत बनाकर खिलजी के पास भेजा गया कि रानी पद्मनी दो शर्तों पर ही उसके पास आएगी , पहली शर्त ये थी कि रानी को रत्न सिंह से मिलने दिया जाएगा और उसके साथ 700 सेविकाएँ भी आयेंगी | मेवाड़ से 700 डोलिया  खिलजी के लिए निकली लेकिन उनमे राजपूत सैनिक थे जो राजा रत्न सिंह को छुडवाने के लिए निकले थे |  Story Of Gora and Badal

सर कटने के बाद भी लड़ता रहा गौरा :

जैसे ही गौरा रत्नसिंह के पास पहुँचे तो राजपूती सैनिक आग बन कर इस्लामिक आक्रान्ताओं पर टूट पड़े और राजा रत्न सिंह को डोली में बिठा कर कुछ सैनिकों के साथ रवाना कर दिया गया | बदले की आग से भरा हुआ गौरा खिलजी के कमरे जा पहुँचा लेकिन खिलजी डर के मारे अपनी पत्नी के पीछे छिप  गया क्योंकि उसको पता था कि राजपूत महिलाओं पर वार नहीं करते | इस मौके का फ़ायदा उठा कर खिलजी के सैनिकों नें गौरा पर वार कर दिया और उसका सिर धड़ से अलग हो गया लेकिन सर धड़ से अलग होने के बाद भी गौरा खिलजी के सैनिकों से लड़ता रहा और अंत में वीरगति को प्राप्त हुआ |  Story Of Gora and Badal

खुदाई में मिल चुके है सबूत

जौहर स्थली

रानी पद्मनी का जौहर :

बादल भी रणभूमि में घायल हो गया है लेकिन उसने जैसे तैसे राजा रत्न सिंह को चितौड़गढ़ किले में  पहुँचा दिया था | लेकिन अंत में खिलजी की सेना ने फिर से किले को घेर लिया और अंत में राजपूत सैनिकों ने साका किया और चितौड़गढ़ की वीरांगनाएँ जौहर की ज्वाला में सदा के लिए अमर हो गईं | Story Of Gora and Badal

Source : Bharatdiscovery  Roarmedia

आशा है , आप के लिए हमारे लेख ज्ञानवर्धक होंगे , हमारी कलम की ताकत को बल देने के लिए ! कृपया सहयोग करें

Quick Payment Link

यह भी पड़िए

descendants of prophet Muhammad

पैगंबर मुहम्मद के वंशज जो बुरका नहीं शॉर्ट्स पहनते हैं , क्लब पार्टी में दारू भी चलती है

descendants of prophet Muhammad : जार्डन के मौजूदा किंग अब्दुल्लाह इस्लाम धर्म के पैगंबर मोहम्मद …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Copyright © 2020 Saffron Tigers All Rights Reserved