Tuesday , 4 August 2020
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कैसे गंगा को पृथ्वी पर लाये थे भगीरथ

भगीरथ कौशल नाम के राज्य के राजा दिलीप के पुत्र थे। छोटी आयु में ही उनके पिता दिलीप की मृत्यु हो गई थी। उसके बाद उनकी माता ने उनका पालन पोषण किया। गजराज बचपन से ही पूछ बुद्धिमान गुरुवार और उदार थे अपनी माता से बहुत ही प्रेम करते थे। पूर्णिया बेबी सभी गुण उन्होंने अपनी माता से ही सीखे थे। भगीरथ की शादी 16 वर्ष की आयु में। राजकुमारी से हुई। राजा के पद पर आसीन होकर भगीरथ। अपनी मां के मार्गदर्शन से राज्य को अच्छे से चला रहे थे।

एक दिन जब यह दरबार में प्रवेश उन्होंने दरबार में प्रवेश किया। तो दरबार में स्थित सभी मंत्री गण उनका स्वागत इस प्रकार से किया क्वेश्चन के साम्राज्य का स्वागत हो शकर वंश की वृद्धि हो महान सम्राट दिलीप के पुत्र की विजय हो राजा भगीरथ की विजय हो। दरबार खत्म होने के बाद वह अपने महल में लौटे तो उनके मस्तिष्क में विचार आया कि सागर जरूर दिलीप राजा दिलीप के बारे में तो भी जानते थे कि उनके पिता है लेकिन सगर कौन थे यह विचार उनके मन में आया।तभी उन्होंने अपने एक मंत्री को बुलाकर सगर के बारे में पूछा। मंत्री ने जवाब दिया।  महाराज सगर आपके दादा थे वे एक महान अजय थे जिन्होंने 100  अश्वमेध यज्ञ पूरे किए थे। उनके 8000 पुत्र थे आप उनके वंशज हो ।  भगीरथ इस उत्तर से असंतुष्ट थे इसीलिए वे अपनी माता से जाकर यही प्रश्न करते है

भगीरथ की माता ने बताया कि राजा सगर कौशल साम्राज्य के शासक थे  वह बहुत ही वीर थे , उन्होंने 99 अश्वमेध यज्ञ किये थे | राजा सगर की दो पत्नियां थी केशिनी और सुमति  उनके कोई संतान नहीं थी इसलिए वह निराश होकर रानियों के साथ हिमालय में तपस्या करने के लिए चले गये राजा सगर भृगु महर्षि  के आश्रम में रहने लगे और तपस्या करने लगे। राजा सगर ने पुत्र प्राप्ति के लिए कठोर तपस्या की , भृगु महर्षि उनके  सामने आए और  राजा को वरदान दिया कि तुम्हारी एक पत्नी से 1 पुत्र होगा जो वंश का संचालन करेगा और दूसरी पत्नी से 60 हज़ार वीर पुत्र होंगे जो तुम्हारी महिमा बढ़ाएंगे। ये वरदान सुनकर रानियों को यह जानने की उत्सुकता हुई कि किसे एक पुत्र और किसे 60000 पुत्र प्राप्त होंगे इस पर  महर्षि ने खुद उनको फैंसला करने को कहा केशिनी ने एक पुत्र की प्राप्ति की मांग की और सुमति ने 60000 पुत्रों की कामना की | राज्य में लौटने के बाद उनको इसी वरदान के अनुसार पुत्र हुए |

Gangotri temple , Uttrakhand

 

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