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क्यों करवाई गई नेता जी सुभाषचन्द्र बोस के परिवार की जासूसी

Subhash Chandra Bose : नेता जी सुभाषचन्द्र बोस के साथ क्या हुआ इसका पता आजतक नहीं चल पाया है | कई इतिहासकारों का मानना है कि 18 अगस्त 1945 को ताइवान के हवाई अड्डे पर विमान दुर्घटना में नेताजी सुभाष चंद्र बोस की मृत्यु हो गई थी। लेकिन कुछ का मानना है कि यह हादसा हुआ ही  नहीं और स्टालिन उन्हें कैद कर लिया था। Subhash Chandra Bose

यह भी कहा गया कि उन्होंने जानबूझकर अपनी मौत की अफवाह फैला दी थी। कई कहते  हैं कि वे संन्यासी बनकर हिमालय में चले गए और कुछ का कहना था कि 1985 तक जीवित रहे और उन्हें भगवन जी के नाम से पुकारा जाता था और वे उत्तरप्रदेश में रह रहे थे|यह भी कहा गया कि  नेहरू के देहांत के समय वे उसके शव के पास देखे गये। सरकार ने इसके लिए दो बार आयोग बिठाया एक  1936 में शाहनवाज तथा 1970 में जीडी खोसला आयोग लेकिन इन दोनों आयोगों ने यह निर्णय निकाला कि नेताजी की मृत्यु विमान दुर्घटना में हो चुकी थी लेकिन 1999 में बनी जस्टिस मुखर्जी की अध्यक्षता में रिपोर्ट  ने यह माना कि ताइवान में ऐसी कोई दुर्घटना हुई ही है। इसका अर्थ यह हुआ कि नेता जी की मृत्यु विमान दुर्घटना में नहीं हुई लेकिन फिर उनकी मृत्यु कैसे |  Subhash Chandra Bose

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लेकिन कांग्रेस की सरकारों ने 1948 से 1988 तक नेताजी के परिवार की जासूसी करवाई थी। बड़ा सवाल है कि अगर 1945 में हवाई हादसे में नेताजी की मौत हो गई थी तो फिर उनके परिवार की जासूसी क्यों करवाई गई थी | क्या नेहरू को उनकी राजनीति वापसी का खतरा लग रहा था क्योंकि अगर नेताजी सुभाष चंद्र बोस जिंदा होते तो देश के प्रधानमंत्री नेहरू नहीं सुभाष चंद्र बोस होते । इस बात का अभी तक कोई प्रमाण नहीं है कि क्यों उनकेपरिवार की  जासूसी करवाई गई और क्यों उनकी मृत्यु की सच्चाई को छुपाया गया |

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