Thursday , 26 November 2020
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Sant Samaj against Murari Bapu and Chitralekha
Sant Samaj against Murari Bapu and Chitralekha

मुरारी बापू और चित्रलेखा के खिलाफ संत हिन्दू समाज

आज कल मुरारी बापू और चित्रलेखा का विवाद हिन्दू समाज में बहुत प्रचलित हो रहा है | सम्पूर्ण संत समाज इनका बहिष्कार करने को बोल रहा है | मुरारी बापू और चित्रलेखा दोनों कथावाचक हैं पर इस बार दोनों को हिन्दू संत समाज ही विरोध कर रहा है | आये जानते हैं क्या है असली विवाद

मोरारीबापू के रामकथाओं में “अली मौला “

मोरारी बापू राम कथा सुनाते सुनते अचानक अली मौला – अली मौला गुण गान करना शुरू कर देते हैं | पहले तोह लोगो ने धयान नहीं दिया अब १ घंटे के परवचन में २० मिनट यह इस्लाम का परचार करते नजर आ रहे हैं | एक जगहं इन्होने बोला ” यह उनके अंदर से निकलता है और अल्लाह उनसे बुलवाते हैं।” उनका एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है, जिसमें वो ‘मुहम्मद की करुणा’ के बारे में बता रहे हैं। मोरारी बापू मुस्लिम परिवारों को खाना खिलाने और उन्हें हज पर भेजने जैसे कामों में भी सक्रिय रहते हैं। इस बात को वो बड़े गर्व के साथ बताते भी हैं। Sant Samaj against Murari Bapu and Chitralekha

संत समाज ने मुरारी बापू कि एक षड्यंत्र के तौर पर देखन शुरू कर दिया है | जेसे कोई मुस्लिम्ही साधू के रूप में नाम कमाए और बाद मेंन लोगो में इस्लाम का परचार करवा कर उन्हें इस्लाम कि तरफ जाने के लिए उकसाए | मुर्ररी बापू के प्स्थरवचन  में १००% हिन्दू परिवार ही होते हैं | हिन्दू परिवारों में इस्लाम के प्रति रूचि जगाने का कार्य मुरारी बापू कर रहे हैं | जिसका विरोध हो रहा है |

देवी चित्रलेखा ” भागवद कथा रोक अज्जान सुनना”

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हरियाणा के पलवल की एक देवी चित्रलेखा नाम की कथावाचिका हैं, जिनके कई वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा में हैं। चित्रलेखा के फ़ेसबुक पर 20 लाख से ज़्यादा फ़ॉलोअर हैं और उनके प्रवचनों में भारी भीड़ जुटती है। वो अपने प्रवचनों में जो ज्ञान देती हैं उसका असर पहली नज़र में पकड़ना आसान नहीं होगा।

एक जगह परवचन करते करते इसने अचानक भगवद कथा रोक थी और बोलने लगी ” अज़ान हो रही है , इसे सुनिए कितने मनमोहक आवाज़ है | अल्लाह बहुत दयालु है ” . जबतक अज्जान खत्म नहीं हुई तब तक इन्होने अल्लाह कि इस्लाम कि अरीफ करनी नहीं छोड़ी |लोगो ने भी  यह सवाल उठाया है कि नमाज़ में जो अल्ला हू अकबर पढ़ा जाता है उसका मतलब ही यही होता है कि अल्लाह के सिवा कोई दूसरा ईश्वर नहीं है। क्या उस धर्म को बराबर कहा जा सकता है जो कहता है कि आपका ईश्वर ग़लत है और आप काफिर हैं? इसी तरह एक चिन्मयानंद बापू हैं जो “तुझको अल्ला रखे” जैसे फ़िल्मी गानों को रामकथा के मंच से सुनाते हैं। Sant Samaj against Murari Bapu and Chitralekha

संत समाज का विरोध

रामकथा प्रवचनों में इस्लाम और ईसाईयत की मिलावट से संत समाज भी दुखी है। कई साधु-संतों ने खुलकर इसका विरोध किया है। श्रीपंचायती अखाड़ा के स्वामी चिदंबरानंद सरस्वती ने इसके ख़िलाफ़ जनजागरण का अभियान शुरू किया है। उन्होंने फ़ेसबुक पर लिखा है कि “कई लोग मुझे फ़ोन करके मुँह बंद रखने को कह रहे हैं, लेकिन मैं अपना काम जारी रखूँगा। कथा के पावन मंच से अगर कोई विधर्मियों का गुणगान करेगा तो इसकी अनुमति नहीं दी जा सकती।” यहाँ यह जानना ज़रूरी है कि कथावाचक कोई हिंदू धर्म के ज्ञानी या सिद्धपुरुष नहीं होते। वो सिर्फ़ कहानियाँ सुनाने के लिए होते हैं ताकि लोगों में धर्म के लिए जागृति पैदा की जा सके। लेकिन कुछ कथावाचकों ने आडंबर की सारी हदें तोड़ दीं। आसाराम बापू, राधे माँ जैसे लोग इसी का उदाहरण हैं।

 

 


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