Wednesday , 8 July 2020
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कैसे हिन्दुओं ने अमृतसर को पाकिस्तान में सम्मलित होने से बचाया

Rss saved Amritsar from Pakistan : 1941 की जनगणना अनुसार अमृतसर की जनसंख्या 376824 थी।

मुस्लिम लीग की योजना अमृतसर और गुरदासपुर नामक दो नगरों को पाकिस्तान में शामिल करवाना था।

इसी उद्देश्य से अमृतसर को केंद्र बनाया। नगर मुस्लिम नेशनल गार्ड ,खासकर और अहरार नामक मुस्लिम

संगठनों का भी गढ़ है। यह संगठन मुसलमानों को शस्त्र चलाने  में प्रशिक्ष्ण देते थे  हैं और अधिकतर  मुस्लिम

जनता भी इसके साथ ही थी। Rss saved Amritsar from Pakistan

लीग के गुंडों का वध Rss saved Amritsar from Pakistan

हिंदुओं के सौभाग्य से अमृतसर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का अच्छा काम था। लीगियो की गुंडागर्दी समाप्त

करने का काम स्वयसेवकों ने किया। हिंदू सभा कॉलेज में लीगी गुंडों का काफी आतंक था और संख्या में कम

होने के बावजूद भी वह भारी पढ़ते थे। कॉलेज में पढ़ने वाले स्वयंसेवकों ने एक बार योजना बनाकर उन्हें ऐसा

सबक सिखाया कि कॉलेज से सभी गुंडों ने नाम ही कटवा दिया। इसी तरह होली वाले दिन हाथी गेट की गलियों

में दो स्वयंसेवकों की हत्या कर दी। मुस्लिम लोग दुर्ग्याणा मन्दिर के सामने से गौ मांस लेकर जाते थे |

उन्हें बहुत रोका गया परंतु  नहीं माने। संघ के लोगों ने कसाइयों को मार डाला और बहुत से घायल हो गये |

उस समय नगर प्रचारक डॉक्टर इन्द्रपाल और नगर सायं प्रमुख डॉ बलदेव प्रकाश थे | उन्होंने अपने सम्पर्क

से सेना से 200 प्रथम चिकित्सा पेटियों की व्यवस्था कर जरूरी स्थानों पर भेजवा दी। पुलिस प्रशासन में उस

समय 70% मुसलमान ही थे | 5 मार्च 1947 में लीगियों ने पाकिस्तान के विरोध में सभा कर रहे अकाली दल

के कार्यकर्ता भगत सिंह की हत्या कर दी । इसके बाद उन्होंने  पहला निशाना हाल बाजार को बनाया।

बाजार को लुटने के बाद आग लगा दी और हिंदुओं सिखों के कारखाने को जलाया गया |

6 मार्च को  पठानकोट से अमृतसर आ रही गाड़ी को शरीफपुर पास रोककर सभी हिन्दू सिखों की हत्या कर दी।

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स्वर्ण मन्दिर को बचाया गया

इसी दिन लीगियों ने कृष्णा मार्केट को लूटने के बाद स्वर्ण मंदिर पर हमले की योजना बनाई। लेकिन आज

पासा पलट चुका था। इसी दौरान संघ के स्वयंसेवकों ने उन्हें घेरकर हमला कर दिया |  इस संघर्ष में

बिजली पहलवान और प्रभात शाखा कार्यवाह गोवर्धन चोपड़ा , देवीदयाल का विशेष योगदान रहा।

संघ ने इस तरह कृष्णा मार्केट में स्वर्ण मंदिर पर हमले की योजना को नाकाम किया। इसके बाद स्वर्ण मंदिर

की सुरक्षा के लिए 75 पूर्ण गणवेश धारी विशेष तौर पर तैनात किये गये। इस दिन हुए दंगे में ग्रामीण क्षेत्रों में 18

और शहर में  6 सिख , 4 हिन्दू और 4 मुसलमान मारे गये थे |  प्रशासन ने हिंदुओं के कहने पर कर्फ्यू तो नहीं

लगाया  लेकिन जब लीगियों को मार पड़नी शुरू हुई तो शहर में कर्फ्यू लगा दिया गया। कर्फ्यू  केवल हिंदुओं

के लिए ही था  लेकिन लीगी तो दिन रात फिर रहे थे | कर्फ्यू की आड़ में 9  मार्च को लीगियों ने एक बार

फिर  स्वर्ण मंदिर पर हमले की योजना बनाई लेकिन संघ के लोगों ने फिर उसे नाकाम कर डाला |

वे सैनिक वर्दी  में वहां पहुंच गए और भयभीत सेवादारों और वह स्वर्ण मंदिर में फंसे हुए यात्रियों के

प्राणों की रक्षा की। Rss saved Amritsar

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