Monday , 23 November 2020
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Nambi Narayan Spy Case
Nambi Narayan Spy Case

बेकसूर इसरो वकील को 6 महीने जेल में रखा गया था , अब मिला न्याय 1.3 का मुआवजा

केरल सरकार ने मंगलवार को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO)के पूर्व वैज्ञानिक नांबी नारायणन को ढाई दशक पुराने जासूसी मामले के निपटारे के लिए 1.30 करोड़ रुपये का अतिरिक्त मुआवजा दिया, जिसमें उन्हें राज्य पुलिस द्वारा फंसाया गया था। बता दें कि पिछले साल दिसंबर में ही केरल राज्य कैबिनेट ने इसरो के पूर्व वैज्ञानिक एस नांबी नारायणन को 1.30 करोड़ रुपये का मुआवजा देने की मंजूरी दे दी थी। Nambi Narayan Spy Case

क्या है मामला ?

  • इसरो के पूर्व वैज्ञानिक नांबी नारायणन (79) द्वारा तिरुवनंतपुरम में सत्र न्यायालय में 2018 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद मामला दर्ज किया गया था।
  • सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि इस मामले में उनकी गिरफ्तारी ‘अनावश्यक’ थी और उन्हें फंसाया गया था।
  • साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें 50 लाख रुपये की अंतरिम राहत देे का आदेश दिया था।
  • सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा था कि नांबी नारायणन इससे ज्यादा के हकदार हैं और वे उचित मुआवजे के लिए निचली अदालत का रुख कर सकते हैं।
  • इससे पहले राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने भी उन्हें 10 लाख रुपये की राहत देने का आदेश दिया था।

सुप्रीम कोर्ट द्वारा मुवाजा

  • सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद केरल सरकार ने पूर्व मुख्य सचिव के. जयकुमार को इस मामले को देखने
  • एक सटीक मुआवजा राशि तय करने और मामले का निपटारा करने को कहा था।
  • बाद में अदालत के समक्ष उनके सुझाव प्रस्तुत किए गए और एक समझौता किया गया।
  • केरल सरकार द्वारा मुआवजे की राशि का चेक स्वीकार करते हुए नांबी नारायणन ने कहा कि मैं खुश हूं।
  • यह केवल मेरे द्वारा लड़ी गई लड़ाई धन के लिए नहीं है। मेरी लड़ाई अन्याय के खिलाफ थी। Nambi Narayan Spy Case
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क्या थे आरोप ?

  • इसरो जासूसी मामला दो वैज्ञानिकों और दो मालदीवियन महिलाओं सहित चार अन्य लोगों द्वारा दुश्मन देशों को काउंटी के क्रायोजेनिक इंजन प्रौद्योगिकी के कुछ गोपनीय दस्तावेजों और सीक्रेट के हस्तांतरण के आरोपों से संबंधित है।
  • नंबी नारायणन के खिलाफ साल 1994 में दो कथित मालदीव के महिला खुफिया अधिकारियों को रक्षा विभाग से जुड़ी गुप्त जानकारी लीक करने का आरोप लगा था।
  • नारायण को इस मामले में गिरफ्तार भी किया था।
  • सु्प्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी कहा था कि नारायणन को काफी यातनाएं दी गईं।
  • इतना ही नहीं, सालों तक जब तक इन्हें न्याय नहीं मिला और बेकसूर साबित नहीं हुए, तब तक इन्हें देश का गद्दार तक कहा गया।
  •  यह मामला उस वक्ता काफी गरमाया हुआ था।
  • इस इसरो जासूसी सनसनीखेज मामले को लेकर कई किताबें लिखी गईं। नारायणन को पिछले साल पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था।

नारायण जी कि राय

  • उनके सहयोगी और दिवंगत पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने आरोप मुक्त होने के बाद मुकदमे से बचने की सलाह दी थी।
  • लेकिन वह गुनाहगारों को सजा दिलाने और मुआवजा पाने के फैसले पर अडिग थे।
  • कहा जाता है कि यह प्रकरण राजनीतिक खींचतान का नतीजा था।
  • इस मुद्दे पर कांग्रेस के एक वर्ग ने तत्कालीन मुख्यमंत्री के करुणाकरण को निशाना बनाया।
  • इस वजह से उन्हें बाद में अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा था।

 

इसरो के वैज्ञानिक नांबी नारायणन को उस गुनाह के लिए सजा और जिल्लत झेलनी पड़ी, जो कभी हुई ही नहीं। केरल पुलिस ने उन्हें रॉकेट के क्रायोजेनिक इंजन की परियोजना से जुड़े दस्तावेजों की चोरी कर मालदीव के रास्ते पाकिस्तान देने के आरोप में गिरफ्तार किया। जबकि सच्चाई यह थी कि वह तकनीक मौजूद ही नहीं थी। Nambi Narayan Spy Case

दो महीने कालकोठरी में बीते थे

  •  नवंबर 1994 में गिरफ्तारी के बाद दिसंबर को जांच सीबीआई को सौंपी गई
  • पुलिस और बाद में सीबीआई मामले की जांच में सबूत नहीं खोज पाई
  •  50 दिनों की कैद के बाद नारायणन को जनवरी 1995 में जमानत मिली
  • अप्रैल 1996 में सीबीआई ने माना मामला फर्जी केस बंद करने का अनुरोध
  • मई 1996 में मजिस्ट्रेट अदालत ने मामला खारिज कर सभी को बरी किया
  • 1996 में माकपा सरकार ने मामले पर दोबारा जांच शुरू करने की पहल की
  • 1998 में सुप्रीम कोर्ट ने मामला रद्द कर सभी को आरोप मुक्त किया

आरोप से मुक्ति नहीं सम्मान की लड़ाई 

  • 1999 में नारायणन ने मुआवजे के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया
  • 2001 में एनएचआरसी ने सरकार से 10 लाख रुपये मुआवजा देने को कहा
  • 2001 केरल सरकार एनएचआरसी के फैसले को अदालत में चुनौती दी
  • 2012 केरल हाईकोर्ट ने एनएचआरसी के फैसले को बरकरार रखा

गुनाहगारों को सजा दिलाने की तमन्ना

  •  अप्रैल 2017 में सुप्रीम कोर्ट में नारायणन की याचिका पर सुनवाई शुरू की
  • गिरफ्तारी में शामिल पुलिस अधिकारियों पर मुकदमा चलाने की थी मांग

 


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