हिन्दू धर्म में पार्थिव शरीर को क्यूँ जलाते हैं ? Importance of burn bodies ?

Importance of burn bodies ? – आज कल लोग अंतिम संस्कार का भी विरोध करने लगे है .  और कर भी कौन रहे है जिनको हमारे धर्म का कुछ भी ज्ञान नहीं है आइये जानते है क्या महत्व है सनातन धर्म में अंतिम संस्कार का . . .

अंतिम संस्कार अथवा दाह संस्कार भी एक महायज्ञ ही हैं, और इसे हम पवित्र अग्नि को समर्पित  उस यजमान की अंतिम आहुति भी कह सकते हैं, जिसनें हिंदू जीवन में निरन्तर यज्ञ किये है, वैसे यज्ञ का एक अर्थ त्याग भी होता हैं। यह वो यज्ञ हैं ,जिसमें हिंदू अंततः स्वयं की देह को भी
समर्पित कर अंतिम त्याग कर देता है। Importance of burn bodies ? 

Importance of burning the dead 
Importance of burning the dead

अग्नि का हमारे जीवन में बहुत महत्त्व है और कर्मकांड से सम्बंधित ग्रंथों में से एक अग्नि पुराण व ऋग्वेद का अग्नि सूक्त अग्नि के महत्व व शक्ति को स्पष्ट करता हैं .

अग्नि-देव-परिचय- Importance of burning the dead 

वेदों में सभी देवों में सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण देव अग्नि है । इसकी महत्ता का परिचय इस बात से मिलता है कि स्वतन्त्र रूप से अग्नि की स्तुति २०० सूक्तों में की गई है 

अभिप्राय भौतिक अग्नि भी है, जीवात्मा भी है, परमात्मा भी है और सेनापति भी है । यह अग्नि मुख्य रूप से यज्ञीय अग्नि का बोधक है ।

सभी यागों का आधार अग्नि ही है , अतः अग्नि के बिना कोई भी धार्मिक कार्य सम्पन्न नहीं हो सकता है । Importance of burn bodies ?

देवों का दूत अग्नि ही  है । यह अग्नि ही देवों का मुख है । जब यज्ञशाला हम यज्ञ में आहुति देते हैं , तब हम सबसे पहले अग्नि का ही आह्वान् करते हैंः–“अग्न आ याहि ।” (सामवेद–१.१.१)

अग्नि का आह्वान सबसे पहले क्यों करते हैं ???

क्योंकि जब हम किसी देवता को मानकर आहुति देते हैं, तब यह अग्नि ही उस देवता को अपने सुवर्णमय रथ में बिठाकर सम्मान के साथ यज्ञशाला में लाता है और अपने मुख से ग्रहण कर उस देवता तक आहुति पहुँचाता है । Importance of burn bodies ?

इसलिए यज्ञ में सबसे पहले अग्नि को प्रज्वलित करते हैं और उससे प्रार्थना करते हैं कि वह पूरे यज्ञ में कभी बुझे नहीं, शान्त न हो—“उद्बुध्यस्वाग्ने प्रतिजागृहि….।” (यजुर्वेदः—१५.५४)

उसके पश्चात् अग्नि को ही समिदाधान करते हैं—-“अयन्त इध्म आत्मा जातवेदः….” Importance of burn bodies ?
(आश्वलायनगृह्यसूत्र—१.१०.१२)

अग्नि मनुष्य का सबसे निकटस्थ देवता है—“अग्निर्वै देवानामवमो विष्णुः परमः ।” ( ऐतरेय-ब्राह्मण-१.१.१.१)

अग्नि भी इन्द्र की तरह वृत्रह है, कैसे ??? क्योंकि अग्नि ही अपान वायु, कार्बन डाय ऑक्साइड को समाप्त करता है, वह पर्यावरण का शोधक है और प्रदूषण रूपी वृत्र का नाश करता है ।

भगवान शिव के त्रिशूल पर विराजमान है काशी नगरी . . .

Importance of burning the dead 

Kashi, the city of Shiva – भगवान शिव के त्रिशूल पर विराजमान है काशी नगरी . . .

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