Tuesday , 1 December 2020
Home - हिन्दू योद्धा - 13 वर्ष की उम्र में धर्म के लिए बलिदान होने वाला हिन्दू
13 वर्ष की उम्र में धर्म के लिए बलिदान होने वाला हिन्दू-वीर हकीकत राय
13 वर्ष की उम्र में धर्म के लिए बलिदान होने वाला हिन्दू-वीर हकीकत राय

13 वर्ष की उम्र में धर्म के लिए बलिदान होने वाला हिन्दू

जिस समय वीर हकीकत राय का जन्म भारत में हुआ उस समय भारत में इस्लाम का अदिप्त्य था और चरों तरफ हिन्दुओं पर जुल्म हो रहे थे | हिन्दुओं को तलवार के जौर पर मुसलमान बनाया जा रहा था | उस समय भारत पर महुम्मदशाह रंगीले का शासन था और शासन हर तरह से हिन्दुओं के खिलाफ तरह तरह के षड्यंत्र रच रहा था | वीर हकीकत राये का जन्म पंजाब के स्यालकोट में 1719 को हुआ |  हकीकत राये के पिता का नाम भागमल था जो एक व्यापारी थे और माता का नाम कौरा था | पिता ने फारसी पड़ने के लिए हकीकत राये को मदरसे में भेजा ताकि वह फारसी पड़े और सरकारी नौकरी पा सके | लेकिन मदरसे में मुस्लिम बच्चे उसे अपने से निचा समझते थे और उसको हर प्रकार से सताते थे | एक दिन मदरसे से लौटते समय उसको रास्ते में रशीद ने रोका और पूछा कि तुमने मौलवी से मेरी शिकायत क्यों कि , उस समय उसका एक और साथी अनवर भी साथ था और उसने भी पूछा कि तुमने मेरे जुआ खेलने की भी शिकायत क्यों की . हकीकत राये ने कोई जवाब नहीं दिया फिर उनका झगड़ा शुरू हो गया | लेकिन रस्ते में मौलवी जा रहा था उसने बच्चों को रोका और अपने अपने घर जाने को कहा | उस समय वीर हकीकत राये केवल 13 वर्ष के थे और उनके रिश्ते की बात भी चल रही थी |

माँ भवानी का अपमान

अनवर और रशीद दोनों हकीकत राये को सबक सिखाना चाहते थे उन्होंने उसे कब्बडी खेलने को कहा लेकिन हकीकत राये ने मना कर दिया और कहा की भवानी माँ की कसम मेरा मन नहीं है लेकिन अनवर ने कहा की एक पत्थर की मुर्तिं को माँ कहते हुए तुझे शर्म नहीं आती लेकिन उसने कहा की वो मेरी माँ है और वह सर्वशक्तिमान है लेकिन अनवर ने कहा की मैं तुमारी देवी माँ को सड़क पर फैंक दूंगा और लोग उस पर चलेंगे | हकीकत राये ने भी ख दिया कि अगर यही शब्द मैं तुम्हारी बीबी फातिमा को बोलू तो कैसे लगेगा | बस इसी बात पर उसे पकड़ कर काज़ी के पास ले जाया गया और मौलवी ने उससे माफ़ी मांगने को कहा लेकिन हकीकत ने कहा की मैंने कुछ गलत नहीं कहा है और मैं माफ़ी नहीं मांगूंगा |

फांसी की सज़ा

हकीकत राये से काजी ने पूछा की तुमने गाली दी है लेकिन उसने कहा कि इन लडकों ने आपको गलत बताया है मैंने कोई गाली नहीं दी लेकिन काजी नहीं माना और उसने हकीकत राये को या तो इस्लाम कबूलने के लिए कहा या फिर मृत्यु दंड के लिए त्यार होने को कहा | उसके पिता ने उसको खूब कहा की तुम इस्लाम अपना लो लेकिन हकीकत राये ने इस्लाम काबुल करने से मना कर दिया और उसने कहा कि अपने धर्म का अपमान नहीं सह सकता |

लाहौर में हाकिम के दरबार में

लाहौर में हकीकत राय के पिता हाकिम के पास हकीकत राये की सज़ा माफ़ करवाने के लिए पहुंचे और उन्होंने अपने बेटे को छोड़ने की गुहार लगाई | फिर उसी समय सज़ा देने वाला काजी भी आ गया और हकीकत राय को शैतान बताने लगा | हकीकत राय को दरबार में पेश किया गया लेकिन उसने हाकिम को सलाम नहीं किया | इस पर हाकिम भडक उठा और कहने लगा की तुमने सलाम क्यों नहीं किया | हकीकत ने जवाब दिया कि सलाम उनको किया जाता है जो सलाम के लायक हो | हाकिम में हकीकत को फिर से इस्लाम स्वीकार करने को कहा लेकिन उसने फिर से इनकार कर दिया | उसके बाद जल्लाद को बुलाया गया और हकीकत राय की गर्दन उड़ाने को कहा और इस तरह हकीकत राये की गर्दन उड़ा दी गई | लेकिन आज हम धर्मनिरपेक्षता के कारण अपन शहीदों को भूलते जा रहें है

1782 में उग्र सिंह नामक एक कवि ने हकीकत राय दी वार  नामक एक पंजाबी गाथा लिखी थी । महाराजा रणजीत सिंह ने विशेष रूप से हकीकत राय को हिंदू शहीद के रूप में सम्मानित किया। 

 


आशा है , आप के लिए हमारे लेख ज्ञानवर्धक होंगे , हमारी कलम की ताकत को बल देने के लिए ! कृपया सहयोग करें

यह भी पढ़ें

Raja Suhaldev  and Battle of Bahraich

ग़ज़नी के भतीजे को भारत से खदेड़ने की गौरवशाली गाथा : Raja Suheldev

Raja Suhaldev  and Battle of Bahraich : राजा सुहेलदेव पासी का अपने समय में इतना …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Copyright © 2020 Saffron Tigers All Rights Reserved