Thursday , 6 August 2020
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Gautam Budh
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गौतम बुद्ध की कहानी – Gautam Budh

Gautam Budh : गौतम बुद्ध का जन्म 563 ईसा पूर्व वैशाख पूर्णिमा के दिन कपिलवस्तु के निकट लुंबिनी ( आज का नेपाल ) में हुआ था। कपिलवस्तु की महारानी महामाया देवी के अपने देवदह जाते हुए रास्ते में प्रसव पीड़ा हुई जिसमें एक बालक का जन्म हुआ। इनके पिता शुद्धोधन एक शाक्य गणराज्य के राजा थे जन्म के पांचवें दिन नामकरण संस्कार किया गया। बालक का नाम सिद्धार्थ रखा गया उनका गोत्र गौतम था इसलिए बालक सिद्धार्थ गौतम के नाम से प्रसिद्ध हुआ। जन्म देने के 7 दिन बाद सिद्धार्थ की मां महामाया देवी की मृत्यु हो गई। उसके बाद सिद्धार्थ का लालन-पालन उनकी मौसी और राजा की दूसरी पत्नी महा प्रजापति गौतमी ने किया। उल्लेखनीय है कि वैशाख पूर्णिमा को बुद्ध पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। क्योंकि इसी दिन गौतम बुद्ध का जन्म हुआ था।

Maya miraculously giving birth to Siddhārtha. Sanskrit, palm-leaf manuscript. Nālandā, Bihar, India. Pāla period

Gautam Budh Birth – गौतम बुद्ध जन्म 

सिद्धार्थ गौतम के जन्म के समय अजीत ऋषि ने उनके बारे में भविष्यवाणी की थी कि यदि यह बालक ग्र्ह्थ रहा तो चक्रवर्ती सम्राट होगा और यदि गृह त्याग कर सन्यासी बना तो बुद्ध होगा। सिद्धार्थ गौतम का 16 साल की आयु में दंड पानी शाक्य की कन्या शोधा के साथ विवाह हुआ और विवाह के बाद उनके एक पुत्र हुआ जिसका नाम राहुल रखा गया | शाक्य परंपरा के अनुसार 20 वर्ष की आयु में सिद्धार्थ गौतम शाक्य संघ में दीक्षित हुए लेकिन उनका कुछ विषयों को लेकर संघ के शेष सदस्यों के साथ निरंतर विवाद था । जिनके परिमाण स्वरूप उन्होंने गृह त्याग कर निर्णय किया और कपिलवस्तु छोड़कर मगध राज्य की राजधानी राजगिरा गये | बुध के गृह त्याग की अवधि को बौद्ध धर्म में अभिनिष्टकमन कहा जाता है। सिद्धार्थ गौतम ने 29 वर्ष की आयु में गृह त्याग किया और 6 वर्ष की कठिन तपस्या की।

File:Buddha in Sarnath Museum (Dhammajak Mutra).jpg

A statue of the Buddha from Sarnath UttarPardesh  India, circa 475 CE. The Buddha is depicted teaching in the Lotus Position , while making the Dharmchakra Mudra

उन्हें 35 वर्ष की आयु में वैशाख की पूर्णिमा की रात्रि को निरंजना नदी के तट पर पीपल वृक्ष के नीचे ज्ञान प्राप्त हुआ। इस ज्ञान प्राप्ति के बाद सिद्धार्थ गौतम बुद्ध कहलाए , जिस स्थान पर उन्हें ज्ञान प्राप्त हुआ वह स्थान बोधगया के नाम से प्रसिद्ध हुआ |

The Mahabodhi Tree at the Sri Mahabodhi Temple in Bodh Gaya

बुद्ध ने अपना पहला प्रवचन सारनाथ काशी के समीप दिया जिसे बौद्ध ग्रंथों में धर्म चक्र प्रवर्तन कहा जाता है। गौतम बुद्ध ने ज्ञान का प्रवेश मार्ग समाज के सभी वर्गों के लिए खोल दिया | इस स्थिति पर स्वामी विवेकानंद ने कहा है कि उस समय भारत के लोगों ने अद्भुत शिक्षा प्राप्त की होगी बुद्ध ने ज्ञान दिया और सर्व साधारण जनता ने उनका अनुसरण किया , यह बुद्ध ज्ञान का ही प्रभाव था कि तत्कालीन राजाओं ने अपने सिंहासन त्याग दिया रानियों ने राजमहल छोड़ दिए यहां तक कि आमजन उनकी शिक्षा की सराहना करते हुए उसका अनुसरण करने लगे।

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