farmers laws will not dismissed 

‘कानून रद्द नहीं होगा, चाहें तो सुप्रीम कोर्ट जा सकते हैं’: कृषि मंत्री का किसान नेताओं को दो टूक जवाब

Farmers laws will not dismissed  : सरकार और किसानों के बीच सातवें दौर की वार्ता भी बेनतीजा रही। अब अगले दौर की बैठक 8 जनवरी को आयोजित होगी। किसानों के कानून रद्द करने की माँग पर सरकार ने एक संयुक्त कमेटी बनाने का प्रस्ताव रखा। लेकिन किसान नेता इस पर राजी नहीं हुए। किसानों की एक ही माँग है कि सरकार एमएसपी पर लिखित में आश्वासन दे और तीनों कानूनों को रद्द करने का वादा करे।

दो टूक में क्या दिया है जवाब

हालाँकि, कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने स्पष्ट कर दिया है कि तीनों कृषि कानूनों को रद्द नहीं किया जाएगा। इसके लिए किसान चाहें तो सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकते हैं। यह बातें किसान मजदूर संघर्ष समिति के सरवन सिंह पंधेर ने कहा, जिन्होंने बैठक में भाग लिया था। उन्होंने कहा, “हम पंजाब के युवाओं से लंबी दौड़ की तैयारी करने का आग्रह करते हैं। हम गणतंत्र दिवस पर एक बड़ा जुलूस निकालेंगे।” farmers laws will not dismissed 

सुप्रीम कोर्ट में चल पड़ा है केस farmers laws will not dismissed 

वहीं सुप्रीम कोर्ट ने किसानों के प्रदर्शन और केंद्र सरकार के तीन नए कृषि कानून को चुनौती देने वाली सभी याचिकाओं पर बुधवार (जनवरी 6, 2021) को सुनवाई करते हुए सीजेआई ने कहा कि सभी याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई की जाएगी। सीजेआई ने कहा कि कोर्ट नए कृषि कानून के खिलाफ दाखिल याचिका पर सोमवार (जनवरी 11, 2021) को सुनवाई करेगी। साथ ही उन्होंने कहा कि वो किसानों की समस्याओं को समझते हैं।

बता दें कि केंद्र सरकार के तीन नए कृषि कानून को रद्द करने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई है। कृषि कानूनों के खिलाफ ये याचिका वकील एमएल शर्मा ने दाखिल की है। याचिका में वकील ने केंद्र सरकार की ओर से लाए तीनों कानूनों को खत्म करने की माँग की है। याचिका में कहा गया है कि नए कृषि कानून कॉर्पोरेट के हितों को प्रोमोट करने वाले और किसानों को नुकसान की ओर ले जाने वाले हैं।

आखिर मामला क्या है ? farmers laws will not dismissed 

गौरतलब है कि पिछले साल केंद्र द्वारा लाए गए तीन नए कृषि कानूनों को वापस लेने की माँग पर अड़े हजारों किसान बीते एक महीने से भी ऊपर वक्त से दिल्ली की सीमाओं पर डटे हैं। यह गतिरोध खत्म करने के लिए केंद्र सरकार किसान संगठनों के साथ कई दौर की वार्ता कर चुकी हैं लेकिन ये सभी बेनतीजा रही हैं।

सातवें दौर की बैठक के बाद कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि किसानों के कानून को वापस लेने की ज़िद पर अड़े रहने के कारण कोई नतीजा नहीं निकल सका। तोमर का कहना था, “हमलोग चाहते थे कि किसान नेता तीनों कृषि कानूनों के एक-एक क्लॉज पर बात करें। हमलोग किसी नतीजे पर नहीं पहुँच सके क्योंकि किसान नेता कानून को वापस लिए जाने की अपनी माँग पर अड़े हुए थे।”

केंद्र सरकार तीन नए कृषि कानून farmers laws will not dismissed 

दरअसल, केंद्र सरकार तीन नए कृषि कानून लेकर आई है, जिनमें सरकारी मंडियों के बाहर खरीद, अनुबंध खेती को मंजूरी देने और कई अनाजों और दालों की भंडार सीमा खत्म करने जैसे प्रावधान किए गए हैं। इसको लेकर किसान लगातार आंदोलनरत हैं और इन कानूनों को वापस लेने की माँग कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि ये कानून मंडी सिस्टम और पूरी खेती को प्राइवेट हाथों में सौंप देंगे, जिससे किसान को भारी नुकसान उठाना होगा। किसान इन कानूनों को खेती के खिलाफ कह रहे हैं और तीनों कानूनों को वापस नहीं होने तक आंदोलन जारी रखने की बात कह रहे हैं। वहीं सरकार का कहना है कि किसानों को विपक्ष ने भ्रम में डाला है, ये कानून उनके फायदे के लिए हैं।

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