Monday , 30 November 2020
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षड्यंत्र: ईसाई मिशनरियों ने की थी भारत के विभाजन की कोशिश

christian missionary wanted to divide India : 1938 में पाकिस्तान की मांग के साथ साथ आदिवासीस्थान की मांग में भी तीव्रता लाई गई थी |

इसके प्रचार कार्य के लिए मुस्लिम लीग ने एक लाख रूपये दिए थे | भारत में राजनितिक स्वाधीनता

के साथ साथ अदिवासिस्थान का आन्दोलन भी तीव्र कर दिया गया |

इसके पीछे का उद्देश्य यह था की पूर्वी बंगाल और हैदराबाद के बीच एक गलियारा सा बन जाये

और यदि भारत और पाकिस्तान के बिच युद्ध छिड जाये तो भारत पर दोहरी मार की जा सके |

लुथ्री और रोमन कौथोलिक मिशनो के पर भाव की छाया में आदिवासियों के सिर पर अलगाव

का जो भुत सवार था उसका पूरा दायित्व ब्रिटिश सरकार और मिशनरियों पर जाता है | सन 1931 की जनगणना में आदिवासियों की डाल को हिन्दुओं के मुख्य तने से काट कर अलग कर दिया गया था|

आदिवासी महासभा का बनना christian missionary wanted to divide India

1941 में शयरी ऍम डी तिग्गा ने छोटा नागपुर केर पुत्री नामक पुस्तक प्रकाशित की |

इसे गौस्नर ईवजेलिक्ल लूथरन प्रेस रांची में छापा गया था |इस पुस्तक में लिखा है

कि आदिवासियों के आर्थिक और राजनितिक पिछड़ेपन को द्केहते हुए 1898 में एक सभा स्थापित की गई | उसका मूल नाम छोटा नागपुर क्रिशिचियन एसोसिएशन था | 1915 में उसमें कुछ शक्तिया गई

और उसका नाम पड़ा छोटा नागपुर उन्नति समाज | 1938 से इसी सभा को आदिवासी महासभा कहा जाने लगा |

22 जनवरी 1939 को रांची में आदिवासी महासभा का प्रथम अधिवेशन श्री जैपाल सिंह , संसद की

अध्यक्षता में हुआ था | अध्यक्ष पद से बोलते हुए उन्होंने कहा था कि बहुसंख्यकों के अत्याचार

से मुक्त होने के अपने आन्दोलन में सब आदिवासी अब एकजुट हो गये है | हमारा एक संयुक्त

मोर्चा बन गया है जो आदिवासियों के इतिहास में एक अनोखी बात है | यहाँ काम करने वाली सभी मिशनरी संस्थाएं हमारे साथ है , यह भी एक महान उपलब्दी है | christian missionary wanted to divide India

बंगाली तक अलग होने के लिए शोर मचा रहें है | यूरोपीय और आंग्ल भारतीय खुल कर हमसे

सहानुभूति दिखा रहें है | हमारी शिक्षा सुविधाओं को किसी भी आधार पर कम नहीं किया जाना चाहिए बल्कि इसके विपरीत मिशनरी संस्थाओं के लिए अनुदान बढ़ा देने चाहिए | christian missionary wanted to divide India

मुस्लिम लीग के साथ सांठ

जैपाल सिंह 1944-1945 के वर्षों में लगातार बंगाल मुस्लिम लीग के सम्पर्क में रहे थे |

बाद में महुम्मद अली जिन्ना के नाम अगस्त 1946 की अपनी कार्यकारिणी के प्रतिवेदन में

आदिवासी महासभा ने बंगास्म के गठन के सम्बद्ध में एक औपचारिक प्रस्ताव रखा और इसमें कहा गया था कि इस क्षेत्र में पूर्वी पाकिस्तान और आदिवासीस्थान सम्मलित होंगे | christian missionary wanted to divide India

इस महासंघ में प्रतेक क्षेत्र का अलग संचार , सीमाशुल्क विधानसभामंडल होगा लेकिन रेल मार्ग ,

संचार , सीमाशुल्क , रक्षा , विदेशनिति , मुद्रा और डाक सेवाओं का प्रबंध सयुक्त रूप से होगा |

इसमें यह भी कहा गया कि इसमें ब्रिटिश सहायता की उपेक्षा की जा सकती है , क्योंकि आदिवासी

-पाकिस्तान महासंघ के निर्माण से छोटा नागपुर में ईसाई मिशनों को खुली छूट मिल जाएगी |

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