Friday , 18 September 2020
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Bhoramdeo Ancient Temple
Bhoramdeo Ancient Temple

Bhoramdeo Ancient Temple – लोग जिसे समझते थे मामूली टीला वो है 10वीं सदी का प्राचीन शिव मंदिर

Bhoramdeo Ancient Temple - आज हम आपको गंडई क्षेत्र के ऐेसे धार्मिक दर्शनीय स्थल से रूबरू करा रहे हैं,
जिसके बारे में बहुत कम ही लोग जानते हैं।
इसके लिए हम आपको ले चलते है गंडई से लगभग 7 किलोमीटर दूर बिरखा घटियारी में।
इस जगह भोरमदेव समकालीन प्राचीन शिव मंदिर। Bhoramdeo Ancient Temple 
जिज्ञासा वाली बात ये है कि 41 साल पहले तक कोई जानता भी नहीं था इस जगह पर प्राचीन शिव मंदिर है।
जमीन में दफ्न यह मंदिर वर्ष 1979 में टीले के उत्खनन से प्रकाश में आया है।
हालांकि सैकड़ों वर्ष तक जमीन में दफ्न रहने की वजह से मंदिर की ज्यादातर मूर्तियों का हिस्सा टूट चुका है।
Bhoramdeo Ancient Temple
Bhoramdeo Ancient Temple

प्राचीन है भोरमदेव मंदिर का इतिहास

भोरमदेव का मंदिर 7वीं से 10वीं सदी का है। Bhoramdeo Ancient Temple

मंदिर के बारे में कहा जाता है कि इसका नाम गोंड राजा भोरमदेव के नाम पर पड़ा है।
स्थानीय किस्सों के अनुसार इस मंदिर को राजा ने ही बनवाया था।
मंदिर के गर्भगृह में एक मूर्ति है, जो मान्यता के अनुसार राजा भोरमदेव की है,
हालांकि इसे सिद्ध करने के लिए कोई ऐतिहासिक प्रमाण नहीं है।
आज भी इस स्थान पर कई प्राचीन मुर्तिआ मिल रही है । Ancient Shiva Temple

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पूर्व मुखी है शिवालय Bhoramdeo Ancient Temple

छग संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग सर्वे रिपोर्ट के अनुसार यह एक पूर्वामुखी मंदिर है।
जिसका निर्माण पत्थरों से किया गया है। इस मंदिर में मंडप और गर्भगृह दो अंग है।
कवर्धा के फणि नागवंशीय राजाओं के राज्यकाल में करीब 10वीं सदी में इस मंदिर का निर्माण कराया गया।
इस मंदिर के दोनों ओर पर सूक्ष्म कुंड निर्मित है। Bhoramdeo Ancient Temple
पुरातत्ववेता की माने तो यह कुंड पानी एकत्र करने के लिए बनाए गए थे,
इसी पानी से स्वत: ही गर्भगृह के जलधारी में स्थापित शिवलिंग का जलाभिषेक होता था।

Bhoramdeo Ancient Temple
Bhoramdeo Ancient Temple

कई प्राचीन प्रतिमाएं है इस मंदिर में

इस स्थान पर कई प्राचीन प्रतिमाएं है जो इसी स्थान से खुदाई के दौरान मिली है ।
मंडप में भगवान गणेश, भैरव, महिषासुर मर्दनी तथा अन्य खंडित प्रतिमाएं रखी हुई है।
गर्भगृह के अलकृंत द्वार चौखट पर घट पल्लव और कीर्तिमुख का अंकन है।
दाएं और बांए द्वार चौखट पर नीचे के भाग में त्रिभंग मुद्रा में चर्तुर्भुजी शैव प्रतिहार प्रदर्शित है।
इस मंदिर परिसर में पौराणिक काल के दौरान अन्य शिव मंदिरों का भी निर्माण होता रहा है,
जिनके ध्वस्त अवशेष स्थल पर बिखरे पड़े हुए है। Bhoramdeo Ancient Temple

 

 


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