Friday , 18 September 2020
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आधुनिक भारत का पहला आतंकवादी अब्दुल रशीद

Swami Shraddhanand : तारीख 23 दिसंबर 1926 । दिल्ली के चांदनी चौक क्षेत्र में दोपहर के समय स्वामी श्रद्धानंद अपने घर में आराम कर रहे थे। वो बेहद बीमार थे। तब वहां पहुंचा एक व्यक्ति नाम अब्दुल रशीद , उसने स्वामी जी से मिलने का समय मांगा। स्वामी जी ने समय दे दिया। वो उनके पास पहुंचा उन्हें प्रणाम किया और देसी कट्टे से 4 गोलियां स्वामी जी के शरीर में आर-पार कर दीं। स्वामी श्रद्धानन्द सरस्वती ने वहीं दम तोड़ दिया। इस तरह भारत के पहले आतंकवादी अब्दुल रशीद ने इस कांड को अंजाम दिया ।

कौन थे स्वामी श्रद्धानन्द सरस्वती:

स्वामी श्रद्धानन्द 1920 के दौर में हिंदुओं के सबसे बड़े धार्मिक गुरू थे और आर्य समाज के प्रमुख थे | असहयोग आंदोलन के समय वो गांधी के सबसे बड़े सहयोगी थे | कुछ इतिहासकारों का दावा है कि स्वामी श्रद्धानन्द सरस्वती जी ने ही मोहन दास करमचंद गांधी को पहली बार महात्मा की उपाधि दी थी। स्वामी    जी ने स्वतंत्रता प्राप्ति के अनेक आंदोलनों में भाग लिया था | वे उस समय   हिन्दू धर्म को बचाने के लिए चलाये   जाने वाले  आंदोलनों के एक बड़े प्रमुख नेता थे |  swami shraddhanand

स्वामी श्रद्धानन्द सरस्वती

क्यों हुई थी स्वामी श्रद्धानन्द सरस्वती की हत्या :

दरअसल स्वामी श्रद्धानन्द ने हिंदू धर्म को इस तरह से जागृत कर दिया था कि पूरी दुनियां हिल गई थी | वो हिंदू धर्म की कुरुतियों को दूर कर रहे थे, नवजागरण फैला रहे थे और उन्होने चलाया था “शुद्धि आंदोलन” जिसकी वजह से भारत के पहले आतंकवादी अब्दुल रशीद ने उनकी हत्या की। शुद्धि आंदोलन अर्थात् वो लोग जो किसी वजह से हिंदू धर्म छोड़ कर मुस्लिम या ईसाई बन गए हैं, उन्हे स्वामी श्रद्धानन्द वापस हिंदू धर्म में शामिल कर रहे थे | इसे आज की भाषा में घर वापसी कह सकते हैं |  ये आंदोलन इतना आगे बढ़ चुका था कि धर्मांतरण करने वाले लोगों की चूलें हिल गईं |  swami shraddhanand

स्वामी श्रद्धानन्द सरस्वती जी पर डाक टिकट (1970)

स्वामी जी ने उस समय के यूनाइटेड प्रोविंस (आज के यूपी) में 18 हज़ार मुस्लिमों की हिंदू धर्म में वापसी करवाई और ये सब कानून के मुताबिक हुआ कुछ कट्टरपंथी मुसलमानों को लगा कि तब्लीग में तो धर्मांतरण एक मज़हबी कर्तव्य है लेकिन एक हिंदू संत ऐसा कैसे कर सकता है ??? तब कांग्रेस के नेता और बाद में देश के राष्ट्रपति बने डा० राजेंद्र प्रसाद ने अपनी किताब “इंडिया डिवाइडेट (पृष्ठ संख्या 117)” में स्वामी के पक्ष में लिखा कि “यदि मुसलमान अपने धर्म का प्रचार और प्रसार कर सकते हैं तो उन्हे कोई अधिकार नहीं है कि वो स्वामी श्रद्धानंद के गैर हिंदुओ को हिंदू बनाने के आंदोलन का विरोध करें”| लेकिन कुछ कट्टरपंथियों की नफरत इतनी बढ़ चुकी थी कि वो स्वामी जी की जान के प्यासे हो गए | नतीजा एक दिन भारत के पहले आतंकवादी मुसलमान अब्दुल रशीद से स्वामी श्रद्धानन्द की हत्या करवा दी गई।

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लेकिन सबसे चौंकाने वाली थी महात्मा गांधी की प्रतिक्रिया|  स्वामी जी की हत्या के 2 दिन बाद गांधी जी ने गुवाहाटी में कांग्रेस के अधिवेशन के शोक प्रस्ताव में कहा कि – “मैं अब्दुल रशीद को अपना भाई मानता हूं… मैं यहां तक कि उसे स्वामी श्रद्धानंद जी की हत्या का दोषी भी नहीं मानता हूं… वास्तव में दोषी वे लोग हैं जिन्होंने एक दूसरे के खिलाफ घृणा की भावना पैदा की… हमें एक व्यक्ति के अपराध के कारण पूरे समुदाय को अपराधी नहीं मानना चाहिए… मैं अब्दुल रशीद की ओर से वकालत करने की इच्छा रखता हूं”

Source : wikipedia

 


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3 विचार

  1. यही सत्य है मोहनदास करमचंद गांधी ने सनातन धर्म का बंटाधार कर दिया और सनातनी ओं का ब्रेनवाश करने के लिए सबसे पहले ईश्वर अल्लाह तेरो नाम सबको सन्मति दे भगवान अल्लाह को जोड़कर सनातनी यों का ब्रेनवाश किया सबसे पहले इसके लिए वह दोषी हैं

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